नीम :- प्रकृति का एक अमूल्य वरदान
सबसे पहले यह प्रश्न आता हैं कि आखिर नीम है क्या ?
नीम एक औषधीय पेड़ है, जिसके लगभग सभी भागों का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। यह महोगनी परिवार से संबंध रखता है और इसका वानस्पतिक नाम अजादिरछा इंडिका (Azadirachta Indica) है। नीम ट्री का जीवनकाल 150-200 साल तक का हो सकता है। अनुमान यह है कि भारत में लगभग लाखों नीम ट्री हैं। वहीं, आयुर्वेद में नीम की अहम भूमिका है। इसका इस्तेमाल त्वचा संबंधी परेशानियों से लेकर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के उपचार के लिए किया जाता रहा है। लेख में आगे हम नीम के औषधीय गुण से लेकर नीम खाने के फायदे से जुड़ी कई सारी जानकारियां देंगे।
अब जानेंगे नीम के औषधीय गुण के बारे में।
नीम के औषधीय गुण
नीम के औषधीय गुण एक नहीं, बल्कि कई सारे हैं। यही कारण है कि इसका इस्तेमाल सदियों से किया जाता रहा है। दरअसल, इसमें एंटी बैक्टीरियल (बैक्टीरिया से लड़ने वाला), एंटी फंगल (फंगस से लड़ने वाला), एंटीऑक्सीडेंट (मुक्त कणों के प्रभाव को कम करने वाला) और एंटीवायरल (वायरल संक्रमण से बचाव) वाले गुण मौजूद हैं। यही नहीं, आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि नीम सांप के जहर के असर को कम करने की क्षमता भी रखता है। इसके अलावा, नीम के फायदे और भी हैं जिसके बारे में हम लेख में आगे हमने विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।
नीम के औषधीय गुण जानने के बाद चलिए, नीम के फायदे जानते हैं।
नीम के फायदे –
नीम कई मायनों में फायदेमंद हो सकता है। इसका उपयोग त्वचा के साथ-साथ कई शारीरिक परेशानियों को भी कम करने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, यहां हम स्पष्ट कर दें कि नीम किसी भी बीमारी का इलाज नहीं है। यह केवल उसके लक्षणों को कम कर सकता है या बीमारी से बचाव कर सकता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए अब जानिए नीम के फायदे –
1. एंटीबैक्टीरियल गुण
इंफेक्शन का खतरा किसी को भी हो सकता है और इसके पीछे का एक कारण नजर न आने वाले छोटे-छोटे बैक्टीरिया भी होते हैं। खासकर, बरसात के दिनों में यह समस्या और बढ़ सकती है। ऐसे में नीम का उपयोग इससे बचाव में मदद कर सकता है। दरअसल, रिसर्च के मुताबिक, नीम एंटी बैक्टीरियल गुणों से समृद्ध होता है। इस अध्ययन से यह बात सामने आई है कि नीम पैथोजेनिक बैक्टीरिया के कारण होने वाले संक्रमण के उपचार के लिए एक प्रभावी एंटीबैक्टीरियल एजेंट के रूप में काम कर सकता है। वहीं, नीम की पत्तियों में मौजूद क्वेरसेटिन (Quercetin) और बी-साइटोस्टरोल (ß-sitosterol) पॉलीफेनोलिक फ्लेवोनोइड में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुणों की पुष्टि हुई है। ऐसे में बैक्टीरियल संक्रमण से बचाव के लिए नीम का उपयोग लाभकारी हो सकता है।
2. रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए
उच्च रक्तचाप की समस्या से बचाव या उसे नियंत्रित करने में भी नीम के फायदे देखे जा सकते हैं। दरअसल, नीम में ब्लड प्रेशर के स्तर को कम करने के गुण मौजूद हैं। वहीं, एनसीबीआई (NCBI-नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, नीम के मेथनॉल-अर्क में मौजूद पॉलीफेनोल में एंटी हाइपरटेंसिव गुण यानी उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के गुण की पुष्टि हुई है । ऐसे में उच्च रक्तचाप की समस्या से बचाव या उसे नियंत्रित करने के लिए नीम का उपयोग लाभकारी हो सकता है। हालांकि, अगर कोई हाई बीपी की दवा का सेवन कर रहा है, तो नीम के सेवन से पहले एक बार डॉक्टरी परामर्श भी जरूर लें।
3. सांस संबंधी समस्याओं के लिए
सांस से संबंधित समस्याओं के लिए भी नीम उपयोगी हो सकता है। इससे संबंधित एक रिसर्च में इस बात की जानकारी मिलती है कि नीम के पत्तों में एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी बैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद हैं। इसके ये सभी गुण पल्मोनरी इन्फ्लेमेशन (pulmonary inflammation- रोगों का समूह जो फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है) के खिलाफ सुरक्षात्मक प्रभाव प्रदर्शित कर सकता है। वहीं, नीम का एंटी-एलर्जिक गुण अस्थमा की समस्या के लिए उपयोगी हो सकता है। ऐसे में दमा की समस्या के लिए योग के साथ-साथ नीम का उपयोग लाभकारी साबित हो सकता है। दमा के लिए नीम एक आयुर्वेदिक औषधि की तरह काम कर सकता है ।
4. अल्सर के लिए नीम का उपयोग
एक शोध के अनुसार, नीम के छाल का अर्क गैस्ट्रिक हाइपरएसिडिटी (गैस्ट्रिक एसिड का अधिक उत्पादन) और अल्सर पर सकारात्मक प्रभाव दिखा सकता है। नीम के छाल का अर्क औषधि की तरह काम कर सकता है। वहीं, एनसीबीआई के एक शोध में नीम में एंटीअल्सर गुण होने का जिक्र किया गया है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि नीम का एंटीअल्सर गुण अल्सर से बचाव में एक सहायक भूमिका निभा सकता है। वहीं, अगर किसी को अल्सर की समस्या है, तो बेहतर है व्यक्ति पहले डॉक्टरी परामर्श के अनुसार इलाज कराएं। साथ ही डॉक्टरी सलाह से ही नीम या नीम युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
5. डायबिटीज में नीम के फायदे
नीम की कड़वाहट मधुमेह की समस्या को नियंत्रित करने में सहायक हो सकती है। दरअसल, एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक रिसर्च से पता चलता है कि नीम हाइपोग्लाइसेमिक (ब्लड शुगर कम होने की प्रक्रिया) प्रभाव प्रदर्शित कर सकता है। ऐसे में इसका हाइपोग्लाइसेमिक प्रभाव ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में उपयोगी हो सकता है। वहीं नीम में एंटी-हाइपरग्लिसेमिक गुण भी मौजूद होता है। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि नीम मधुमेह की समस्या से बचाव करने में या ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। वहीं, अगर कोई मधुमेह की दवा का सेवन कर रहा है, तो बेहतर है नीम के सेवन से पहले डॉक्टरी परामर्श लें।
6. ओरल हेल्थ में नीम के फायदे
मुंह से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए नीम का उपयोग किया जा सकता है। माना जाता है कि माउथ क्लीनर प्रोडक्ट, जिनमें नीम का अर्क मौजूद होता है, मुंह के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है। साथ ही नीम में मौजूद एंटीमाइक्रोबियल गुण दांतों में प्लाक को बढ़ाने वाले स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटन (Streptococcus Mutans) जैसे बैक्टीरिया को पनपने से रोक सकता है। इसके अलावा, एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर नीम की पत्तियां मुंह और मसूड़ों में सूजन की स्थिति को ठीक करने में मदद कर सकती हैं। साथ ही नीम मसूड़ों से ब्लीडिंग, दांतों की सड़न की समस्या से भी बचाव कर सकता है। आज भी स्वस्थ दांत के लिए कई लोग नीम के दातून का उपयोग करते हैं। ऐसे में आप भी दांतों को मजबूत बनाने के लिए कभी-कभी नीम के दातून का विकल्प चुन सकते हैं।
7. कुष्ठ रोग में नीम का उपयोग
कुष्ठ रोग के कुछ लक्षणों को भी कम करने में नीम के फायदे देखे जा सकते हैं। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, कुष्ठ रोग के उपचार के तौर पर नीम के बीज के तेल के उपयोग की बात कही गई है। वहीं, आयुर्वेद में भी कुष्ठ रोग के इलाज के लिए नीम के पत्तों को उपयोगी बताया गया है। हालांकि, नीम का कौन सा गुण कुष्ठ रोग के लिए उपयोगी हो सकता है, इस बात की पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही इस विषय में शोध काफी सीमित है। ऐसे में हम यहां स्पष्ट कर दें कि कुष्ठ रोग जैसी अवस्था में सिर्फ नीम के उपयोग पर निर्भर न करते हुए, डॉक्टर से उपचार कराना भी जरूरी है। बेहतर है इस विषय में डॉक्टरी इलाज को प्राथमिकता दी जाए।
8. मलेरिया के उपचार में नीम का उपयोग
मलेरिया के प्रभाव और इसके लक्षणों को कम करने में नीम के पत्तों के फायदे देखे जा सकते हैं। दरअसल, नीम की पत्तियां एंटीमलेरियल गुणों (Antimalarial Properties) से भरपूर होती है, जो मलेरिया की दवा के रूप में काम कर सकती है और इस समस्या से उबरने में मदद कर सकती हैं । ऐसे में मलेरिया के उपचारके लिए डॉक्टरी इलाज के साथ-साथ नीम का घरेलू उपाय भी आजमाया जा सकता है। हालांकि, मलेरिया में नीम का उपयोग कैसे और कितनी मात्रा में करना है, इस बारे में डॉक्टरी परामर्श जरूर लें।
9. पेट के स्वास्थ्य के लिए नीम
पेट के स्वास्थ्य के लिए भी नीम के पत्ते के फायदे देखे जा सकते हैं। दरअसल, नीम का इस्तेमाल कई सालों से आयुर्वेदिक चिकित्सा में अल्सर और अन्य प्रकार की गैस्ट्रिक समस्याओं के लिए एक किया जाता रहा है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध में यह बात सामने आई है कि नीम शरीर से विषाक्त पदार्थों और हानिकारक जीवाणुओं को बाहर निकाल सकता है। नीम का यह गुण स्वस्थ पाचन तंत्र में सुधार करने में सहायक हो सकता है। साथ ही यह पेट को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है।
10. लिवर को स्वस्थ रखने में नीम का प्रयोग
लिवर के लिए नीम लाभकारी हो सकता है। दरअसल, नीम का उपयोग लिवर के क्षति और कैंसर से बचाव कर सकता है। वहीं, एनसीबीआई की वेबसाइट पर पब्लिश एक स्टडी के अनुसार, नीम में मौजूद एजेडिराक्टिन-ए (azadirachtin-A) कंपाउंड हेप्टोप्रोटेक्टिव (Hepatoprotective) यानी लिवर को सुरक्षा देने वाला गुण प्रदर्शित कर सकता है। ऐसे में लिवर को स्वस्थ रखने के लिए नीम का सेवन उपयोगी हो सकता है ।
11. कैंसर से बचाव के लिए नीम
एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार, नीम के बीज, पत्ते, फूल और फलों का अर्क विभिन्न प्रकार के कैंसर के विरुद्ध कीमोप्रिवेंटिव, एंटी कैंसर और एंटीट्यूमर गुण को प्रदर्शित कर सकता है। इसके अलावा, नीम का अर्क कैंसर कोशिकाओं के प्रसार को रोकने में भी मदद कर सकता है। खासतौर से, प्रोस्टेट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, स्तनों का कैंसर, पेट के कैंसर से बचाव के लिए नीम उपयोगी हो सकता है। ऐसे में, कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए नीम का प्रयोग किया जा सकता है। साथ ही हम स्पष्ट कर दें कि कैंसर एक गंभीर बीमारी है। इसलिए, अगर किसी को यह रोग है, तो उसके लिए डॉक्टरी इलाज ही प्राथमिकता होनी चाहिए।
12. कोलेस्ट्रॉल स्तर को कम करने में सहायक
नीम का उपयोग कोलेस्ट्रॉल के लिए भी लाभकारी हो सकता है। दरअसल, एनसीबीआई ने इस संबंध में एक रिसर्च को प्रकाशित किया है। इस रिसर्च के अनुसार, नीम की पत्तियों का अर्क खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने में सहायक पाया गया। फिलहाल, यह शोध चूहों पर किया गया है। मनुष्यों पर इसके प्रभाव को जानने के लिए और शोध की आवश्यकता है। हालांकि, कोलेस्ट्रॉल की समस्या से बचाव के लिए नीम का उपयोग किया जा सकता है। वहीं, अगर किसी को कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, तो वह डॉक्टर की परामर्श अनुसार दवा और कोलेस्ट्रॉल कम करने की डाइट में नीम को शामिल करने की सलाह जरूर लें।
13. गर्भनिरोधक के रूप में काम करता है
नीम का उपयोग गर्भनिरोधक के रूप में भी किया जा सकता है। इससे जुड़े शोध, से पता चलता है कि यह शुक्राणुओं के प्रसार को 0.05 से 1 प्रतिशत तक कम कर सकता है। नीम में मौजूद इम्यून मॉड्यूलेटर (immune modulators) गुण उन कोशिकाओं और मैक्रोफेज (macrophages- एक प्रकार की कोशिका) को जीवित करते हैं, जो गर्भावस्था को समाप्त कर सकते हैं।
वहीं, एनसीबीआई की वेबसाइट पर मौजूद एक रिसर्च में इस बात का साफ तौर से जिक्र है कि आसानी से उपलब्ध नीम का तेल एक गर्भनिरोधक की तरह काम कर सकता है। साथ ही यह सस्ता और नॉन टॉक्सिक भी है। हालांकि, नीम में मेल एंटी फर्टिलिटी प्रभाव भी देखा गया है। इस शोध के अनुसार, नीम पुरुषों की प्रजनन क्षमता में कमी ला सकता है। ऐसे में इस विषय में नीम के फायदे और नुकसान दोनों हो सकते हैं। इसलिए, हमारी राय यही है कि महिला और पुरुष नीम या नीम के तेल के उपयोग से पहले एक बार डॉक्टरी सलाह जरूर लें।
14. घाव और रैशेज के लिए नीम
त्वचा के लिए भी नीम के लाभ देखे जा सकते है। एनसीबीआई की शोध के मुताबिक, नीम का उपयोग घावों के उपचार के लिए सदियों से किया जाता रहा है। दरअसल, इसमें वूंड हिलिंग (wound healing) गुण मौजूद होते हैं, जो घावों को भरने में काफी हद तक मदद कर सकते हैं। वहीं, एक अन्य शोध में इस बात का साफ तौर से जिक्र मिलता है कि नीम या नीम के तेल का इस्तेमाल घाव के साथ-साथ रैशेज की समस्या को कम करने में भी प्रभावी हो सकता है। ऐसे में सामान्य घाव या कटने-छिलने पर नीम का लेप उपयोगी हो सकता है। वहीं, अगर जख्म गहरा हो, तो डॉक्टरी इलाज को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
15. मुंहासों के लिए नीम के फायदे
मुंहासों से निजात पाने के लिए नीम का उपयोग बेहद लाभकारी माना जा सकता है। नीम का उपयोग मुंहासों का कारण बनने वाले बैक्टीरिया को पनपने से रोकने में सहायक हो सकता है। वहीं, इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं। जिस कारण कील-मुंहासों की समस्या से बचाव के लिए यह उपयोगी हो सकता है। मुंहासे से छुटकारा पाने के लिए नीम का पेस्ट या फेस पैक लाभकारी हो सकते हैं। ऐसे में नीम का उपयोग त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए किया जा सकता है।
16. जूं और लीख (lice) में उपयोगी है नीम
बालों से जूं और लीख को खत्म करने के लिए नीम का उपयोग किया जा सकता है। एक वैज्ञानिक शोध में नीम के तेल को जुओं के खिलाफ कारगर उपाय माना गया है। खासकर इसे बच्चों में सिर की जूं के उपचार में प्रभावी माना जा सकता है। ऐसे में जूं की समस्या से निजात पाने के लिए नीम के तेल को शैम्पू में डालकर उपयोग किया जा सकता है।
17. रूसी में नीम के फायदे
रूसी को कम करने के लिए नीम से बना तेल प्रकृति का उपहार साबित हो सकता है। दरअसल, नीम में एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं, जो रूसी का कारण बनने वाले फंगस को खत्म करने में सहायक हो सकते हैं। यही नहीं, नीम का तेल डैंड्रफ हटाने के साथ-साथ स्कैल्प को साफ रखने का काम भी कर सकता है। तो रूसी की समस्या से बचाव के लिए नीम का पैक या तेल उपयोग कर सकते हैं।
लेख के इस भाग में हम नीम में पाए जाने वाले पौष्टिक तत्वों के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
नीम के पौष्टिक तत्व –
इसमें कोई शक नहीं है कि नीम के लाभ कई सारे हैं। ऐसे में यहां हम नीम में मौजूद कुछ खास पोषक तत्वों और रसायनों की जानकारी देंगे, जो नीम को एक प्रभावी औषधि बनाते हैं। तो नीम मौजूद पोषक तत्व और रसायन कुछ इस प्रकार हैं :
प्रोटीन
कैल्शियम
विटामिन सी
कार्बोहाइड्रेट
फाइबर
वसा
अमीनो एसिड
नाइट्रोजन
फास्फोरस
पोटेशियम
टैनिक एसिड
लेख के इस भाग में जानिए नीम का उपयोग कैसे किया जा सकता है।
नीम का उपयोग –
नीम के फायदे जानने के बाद यह सवाल उठता है कि इसका उपयोग कैसे करें। तो चलिए हम इसका उत्तर भी आपको दे देते हैं। नीम के लाभ के लिए नीम का उपयोग नीचे बताए गए तरीकों से किया जा सकता है –
☞नीम के पत्तों का लेप फेस मास्क के रूप में किया जा सकता है।
☞ब्लड प्यूरीफायर के रूप में आधे कप पानी में आधा चम्मच नीम की पत्तियों का रस मिलाकर सेवन किया जा सकता है।
☞नीम का पत्ता पीसकर घावों पर लेप के रूप में लगाया जा सकता है।
☞नीम के पतले डालों का इस्तेमाल दातुन के रूप में किया जा सकता है।
☞नीम का पत्ता फ्राई करके भी खाया जा सकता है।
☞रूसी और जूं को कम करने के लिए भी नीम के पत्तों से बना तेल उपयोग किया जा सकता है।
नीम के उपयोग की मात्रा : नीम की कितनी मात्रा का इस्तेमाल करना चाहिए, यह व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। इस संबंध में अभी कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसलिए, नीम का सेवन कितनी मात्रा में करना है, इस बारे में डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर विकल्प हो सकता है।
हम नीम का तेल बनाने की विधि बता रहे हैं।
नीम का तेल बनाने की विधि ┗(•ˇ_ˇ•)―→
यूं तो नीम का तेल आसानी से बाजार में उपलब्ध होता है, लेकिन उसमें कई सारे रासायनिक तत्व मिले हो सकते हैं। ऐसे में घर में बनाया गया नीम का तेल बाजार में मिलने वाले नीम तेल की तुलना में ज्यादा शुद्ध और सुरक्षित हो सकता है। तो चलिए जान लेते हैं घर में नीम का तेल बनाने की विधि –
सामग्री :
नीम की पत्तियां – एक कटोरी
नारियल का तेल – एक कटोरी
कांच की बोतल- एक
ग्राइंडर (पत्ती को पिसने के लिए)
छन्नी (तेल छानने के लिए)
नीम का तेल बनाने की विधि :
सबसे पहले नीम की पत्तियों को अच्छे से धो कर सुखा लें।
इसके बाद इन पत्तियों को ग्राइंडर में डालकर पीस लें।
फिर इसमें नारियल का तेल डालें और थोड़ा सा और ग्राइंड कर लें।
जब नीम की पत्तियां और नारियल का तेल अच्छे से मिल जाए, तो इसे एक पैन में डालकर हल्के फ्लेम पर गर्म करें।
इसे चार से पांच मिनट तक कम आंच पर पकाएं। ध्यान रहे नीम की पत्तियां जले ना।
जब दोनों मिश्रण अच्छे से मिल जाएं, तो गैस बंद कर दें।
फिर उसे थोड़ी देर ठंडा होने दें।
मिश्रण जब ठंडा हो जाए, तो अब इस तेल को छन्नी की मदद से एक बोतल में छान लीजिए। तैयार है नीम का तेल।
लेख के अंत में जानिए नीम के नुकसान के बारे में।
नीम के नुकसान –
नीम कहने को तो प्रकृति का वरदान है, लेकिन इसका इस्तेमाल सतर्कता के साथ ही किया जाना चाहिए, आइये जानते हैं क्यों :
एक रिसर्च के मुताबिक, नीम के अर्क में ब्लड शुगर के स्तर को कम करने की क्षमता होती है। ऐसे में जिन लोगों को लो ब्लड शुगर की समस्या है, बेहतर है वे लोग नीम के सेवन से परहेज करें। अगर नीम का सेवन करते भी हैं, तो उन्हें अपने ब्लड शुगर लेवल की नियमित जांच और निगरानी करना आवश्यक है।
शुगर के मरीज इसका सेवन डॉक्टरी परामर्श से करें क्योंकि इसमें ब्लड शुगर की मात्रा को कम करने का गुण भी मौजूद है। ऐसे में इसका सेवन ब्लड शुगर लेवल को सामान्य से कम कर सकता है। खासतौर से, अगर कोई मधुमेह की दवा का सेवन कर रहा है, तो नीम के सेवन से पहले विशेषज्ञ की राय जरूर लें।
अगर किसी की त्वचा संवेदनशील है तो, नीम के इस्तेमाल पहले पैच टेस्ट जरूर करें ।
एलर्जी की समस्या वाले लोगों को नीम के सेवन से बचना चाहिए।
जैसे कि हमने पहले ही जानकारी दी है कि नीम में गर्भनिरोधक गुण मौजूद होते हैं। जानवरों पर किए गए शोध में, नीम का अर्क गर्भावस्था को समाप्त करने में सफल पाया गया है। ऐसे में, इस स्टडी को ध्यान में रखते हुए, यह जरूरी है कि गर्भवती महिलाओं को भी नीम के सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेना चाहिए।
इसके अलावा, कई अध्ययनों में बच्चों में नीम के तेल के दुष्प्रभाव को भी देखा गया है। एक रिसर्च के अनुसार, बच्चों में नीम के तेल का सेवन उल्टी, अधिक नींद और सांस संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। इतना ही नहीं, नीम का तेल जान का जोखिम भी पैदा कर सकता है। ऐसे में बच्चों के लिए तेल का मौखिक उपयोग उचित नहीं है। अगर डॉक्टर द्वारा निर्धारित किया जाए तो ही बच्चे को नीम का तेल दें।
यही नहीं, नीम के तेल का टॉक्सिक प्रभाव डायरिया और मतली का कारण भी बन सकता है।
नोट : गर्भवती और बच्चों को नीम या नीम युक्त खाद्य पदार्थ देने से पहले डॉक्टरी सलाह जरूर लें। इसके अलावा, अगर किसी को कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तब भी नीम का सेवन विशेषज्ञ से राय लेने के बाद ही करें।
उम्मीद है कि इस लेख के जरिए आप नीम के पत्तों के फायदे जान गए होंगे। इसमें कोई शक नहीं है कि नीम ट्री औषधीय गुणों से भरपूर होता है। हालांकि, नीम के लाभ के साथ-साथ सावधानी के तौर पर हमने लेख में नीम के नुकसान की भी जानकारी दी है। वहीं, नीम के नुकसान से बचाव के लिए हमने लेख में नीम के उपयोग की जानकारी भी साझा की है। ऐसे में सही तरीके से नीम का उपयोग कर नीम का लाभ उठाया जा सकता है। हालांकि, एक बार फिर से आपको बता दें कि नीम किसी बीमारी का इलाज नहीं है, बल्कि बीमारी के प्रभाव और लक्षणों को कम करने के लिए उपयोगी हो सकता है। हां, हो सकता नीम के सेवन से कुछ बीमारियों का जोखिम कम हो। ऐसे में नीम के लाभ से जुड़े इस लेख को दूसरों के साथ साझा कर, हर किसी को नीम के फायदे बताएं।
नोट : गर्भवती और बच्चों को नीम या नीम युक्त खाद्य पदार्थ देने से पहले डॉक्टरी सलाह जरूर लें। इसके अलावा, अगर किसी को कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तब भी नीम का सेवन विशेषज्ञ से राय लेने के बाद ही करें।
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